Pradeshik Cooperative Dairy Federation, Uttar Pradesh

प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन, उत्तर प्रदेश

तकनीकी इनपुट

दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे- संतुलित आहार, प्रजनन, अच्छे आवास, उचित स्वास्थ्य देखभाल आदि पर निर्भर करता है । पी०सी०डी०एफ० द्वारा, दुग्ध समितियों के माध्यम से टी०आई०पी० कार्यक्रम के अंतर्गत निम्न सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं –

  • डिवोर्मिंग कार्यक्रम-
    दुधारू पशुओं के पेट एवं आंतों में पनपने वाले एंडोपैरासाइट से, जानवरों में एनीमिया व गैस्ट्रोएन्टेरिटिस जैसी बीमारियाँ हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप दूध की उत्पादन में कमी, भूख न लगना, क्षीणता आदि लक्षण होते हैं जिससे पशुओं की मृत्यु तक हो जाती है |
  • टिक कण्ट्रोल-
    दुधारू पशुओं में एक्टोपैरासाइट से होने वाली यह आम बीमारी है जिसमे जानवरों में बहुत आम है जिसमें जानवरों की खाल पर टिक्स चिपक जाती है और खून चूसती है। इसके परिणामस्वरूप दूध की उत्पादन में कमी, एनीमिया, तेज इन्फेक्शन आदि लक्षण होते हैं जिससे पशुओं की मृत्यु तक हो जाती है |
  • थनैला कण्ट्रोल-
    थनैला से पीड़ित दुधारू पशुओं में स्तन ग्रंथि संक्रमित हो जाती हैं जिससे दूध की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में असर पड़ता है। यह बीमारी जानवरों के रहने के स्थान में गन्दगी के कारण होती है।
  • कृत्रिम गर्भाधान-
    कृत्रिम गर्भाधान जानवरों की नस्लों के सुधार से दूध उत्पादन में वृद्धि का एकमात्र उपाय है । चार क्लस्टर ए.आई. केंद्र लखनऊ, लखीमपुर, बिजनौर एवं मेरठ में काम कर रहे हैं ।
  • हरा चारा बीज उत्पादन-
    हरा चारा रसीला, स्वादिष्ट और आसानी से पचने योग्य होता है जिसे डेयरी पशु रुचि के साथ खाते हैं। हरे-हरे चारे की फसल से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।