दुग्धशाला विकास विभाग, उत्तर प्रदेश
Dairy Development Department, Uttar Pradesh

दुग्धशाला विकास विभाग, उत्तर प्रदेश, डेयरी, डेयरी यू पी, दुग्ध विभाग, प्रमुख कार्यालय

मुख्य कार्यकलाप

विभाग के कार्यकलाप

  • विभाग द्वारा संचालित किये जा रहे विभिन्न कार्यकलाप मुख्य रूप से निम्नानुसार तीन भागों में विभाजित हैं:-

(क) रेग्यूलेटरी कार्यकलाप-

  • इसके अन्तर्गत विभिन्न नियम/अधिनियम लागू करना, यथा- सहकारी समितियों का निबन्धन, आडिट, पंजीयन, निरीक्षण, इंजीनियरिंग आदि कार्य सम्मिलित हैं।
(ख) विकास संबंधी कार्य-
  • प्रदेश में दुग्धशाला विकास के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कराना ।
(ग) व्यावसायिक कार्यक्रम-
  • दुग्ध उपार्जन एवं विपणन का क्रियान्वयन दुग्ध सहकारिताओं के माध्यम से कराना।
विभाग के कार्यकलापों का ढांचा

विभाग के प्रमुख के रूप में दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश समस्त दुग्ध समितियों, दुग्ध संघों और शीर्ष स्तर पर पी0सी0डी0एफ0 के रेगुलेटरी कार्यो के लिए उत्तरदायी हैं तथा सहकारिता पद्धति के अंतर्गत निबंधक के दायित्वों का भी निर्वहन करते हैं।

दुग्धशाला विकास विभाग की योजनाओं का बजट नियंत्रण भी दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाता है।

दुग्धशाला विकास विभाग के सहकारी कार्यकलाप त्रिस्तरीय ढांचे के माध्यम से क्रियान्वित किए जा रहे है। ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादक सदस्यों की दुग्ध समितियां गठित कर उन्हे दुग्ध उत्पादन उचित मूल्य, उपार्जन के लिए सहायता एवं सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती हैं, उनसे जनपद/मंडल स्तर पर संचालित दुग्ध संघ द्वारा दुग्ध क्रय किया जाता है। जनपद / मंडलीय स्तरीय दुग्ध संघों में प्रादेशिक कोआपरेटिव डेरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) समन्वय हेतु तकनीकी एवं व्यावहारिक नियंत्रण प्रभावी है।